पिछले कुछ वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) का क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है, और इसमें सोलर ऊर्जा प्रमुख भूमिका निभा रही है। भारत भी इस वृद्धि में आगे है — घरेलू स्तर पर सोलर पैनल छतों पर बहुत आम हो गए हैं।
भविष्य में भी इस क्षेत्र के विस्तार के काफी ज़्यादा आसार हैं। रिन्यूएबल एनर्जी में भी सोलर एनर्जी का सबसे अधिक योगदान है। वहीं भारत, दुनिया भर के सोलर एनर्जी के अग्रणी उत्पादक देशों में से एक है। दुनिया भर में बिजली की बढ़ती मांगों को पूरा करने का सोलर एनर्जी के अलावा, दूसरा कोई बेहतर विकल्प नहीं है।
इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में लगातार हो रही बढ़ोतरी को भी सोलर एनर्जी के माध्यम से ही पूरा किया जा सकता है। बिजली की बढ़ती कीमतों के कारण, अब सोलर पैनल लोगों के घरों की छतों पर भी नज़र आने लग रहे हैं। इस ब्लॉग में हम आपको सोलर पैनल और सोलर एनर्जी के बारे में सारी जानकारी देंगे। साथ ही, यहां हम आपको यह भी बताएंगे, कि क्यों सोलर सिस्टम आपके लिए सबसे बेहतरीन विकल्प है और सोलर सिस्टम लगाने के बाद, आप प्रत्येक वर्ष कितने रूपए की बचत कर सकते हैं।
क्या होते हैं सोलर पैनल/ सोलर सिस्टम?
आज से कुछ वर्ष पहले तक, जो बिजली हमें सामान्य तौर पर घरों में उपलब्ध होती है, उसका निर्माण या तो कोयले से या फिर रेडियोएक्टिव पदार्थों से होता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एक और विकल्प आम लोगों के सामने उभर कर आया है, जो किफायती होने के साथ-साथ भरोसेमंद भी है। यह विकल्प है सोलर सिस्टम, जिसके ज़रिए आप अपनी ज़रूरत की बिजली घर पर ही पैदा कर सकते हैं।
सोलर सिस्टम में लगे सोलर पैनल, इन पर गिरने वाली सूर्य की किरणों को बिजली में बदल देते हैं। छतों पर लगाए जाने वाले इन सोलर पैनलों को “रूफ टॉप सोलर सिस्टम” कहते हैं। इससे उत्पन्न होने वाली बिजली को आप, सोलर सिस्टम के साथ आने वाली बैटरियों में इकट्ठा कर सकते हैं और फिर वहां से इस बिजली का अपने घरों में इस्तेमाल कर सकते हैं। यह सोलर पैनल, दिन में सूर्य की किरणों में चार्ज होते रहते हैं।
सोलर सिस्टम क्यों बेहतर विकल्प हो सकता है?
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कम बिजली का खर्च: पारंपरिक बिजली महंगी होती जा रही है, लेकिन सोलर सिस्टम की कीमत धीरे-धीरे घट रही है।
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सरकारी सब्सिडी की सुविधा: भारत में कई राज्य सरकारें और केंद्र सरकार सोलर सिस्टम लगाने के लिए सब्सिडी देती हैं, जिससे कुल खर्च काफी कम हो जाता है।
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बिजली कटौती से राहत: जहां बिजली कटौती आम है, वहां सोलर सिस्टम आपके लिए भरोसेमंद ऊर्जा स्रोत बन सकता है।
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दीर्घकालिक निवेश: एक बार सिस्टम लगने के बाद, आप सालों तक बिजली बना सकते हैं और बिल में बचत कर सकती हैं।

सोलर सिस्टम अपनाने के फायदे :
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लागत में कमी
बिजली की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जबकि सोलर टेक्नोलॉजी की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। इस वजह से, सोलर सिस्टम को स्थापित करना आर्थिक रूप से ज्यादा व्यवहार्य हो गया है। -
सरकारी सब्सिडी
भारत में केंद्र और राज्य सरकारें सोलर सिस्टम पर सब्सिडी देती हैं, जिससे शुरुआती निवेश बहुत कम हो सकता है। यह कदम सोलर को अधिक किफायती बनाता है। -
ऊर्जा आत्मनिर्भरता
रूफ-टॉप सोलर सिस्टम लगाने से आप बिजली कटौती (पॉवर कट) जैसी समस्याओं से बच सकते हैं। अपनी खुद की सौर-उत्पन्न बिजली होने से, आप बिजली ग्रिड पर निर्भरता कम कर सकते हैं। -
दीर्घकालिक बचत और निवेश रिटर्न
एक बार सोलर सिस्टम स्थापित हो जाने के बाद, यह वर्षों तक काम कर सकते हैं और आपके बिजली बिल में सालाना उल्लेखनीय बचत कर सकता है।
क्यों सोलर सिस्टम, बिजली सप्लाई का सबसे बेहतरीन विकल्प हैं?
हाल ही में, दुनिया भर में कोयले की सप्लाई में रुकावट आने के कारण लगभग हर तरह के व्यवसाय पर इसका असर दिखा है। घरों में बिजली पिछले एक दशक दोगुना से भी अधिक महंगी हो चुकी है। इसके अलावा, छोटे शहरों में लगातार होते ‘पॉवर कट’ से भी लोगों को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सोलर सिस्टम लगाने के बाद, आपको ऐसी किसी भी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।
- सोलर सिस्टम का किफायती होना: आपको यह जानकर हैरानी होगी, कि जहां देश में बिजली के दाम लगातार आसमान छू रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सोलर सिस्टम की कीमतें साल दर साल गिरती ही जा रहीं है। इसका कारण यह है, कि सोलर सिस्टम की बढ़ती हुई मांग के कारण इसके निर्माता इसे बड़े स्तर पर बना रहे हैं, जिससे उन्हें अधिक मुनाफा हो रहा है। इसके फलस्वरूप, सोलर सिस्टम की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है।
- सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी: भारत सरकार के साथ-साथ देश की लगभग सभी राज्य सरकारें, घरों में सोलर सिस्टम लगाने के लिए अच्छी खासी सब्सिडी देती हैं। कुछ राज्यों में यह सब्सिडी कुल लागत की 50% तक भी जाती है, जिससे आपका अपने घरों में सोलर सिस्टम लगाना बेहद किफायती हो जाता है। इसके अलावा, सरकार द्वारा अब सोलर पैनल इंस्टाल करवाने की प्रक्रिया को भी काफ़ी आसान कर दिया गया है। इसके साथ ही, घरेलू सोलर सिस्टम पर टैक्स की दरों में भी भारी कटौती की गई है।
- 24 घंटे बिजली की सप्लाई: आमतौर पर, कई लोगों को अपने घरों में बिजली कटौती की समस्या का सामना करना पड़ता होगा। बिजली कंपनियों पर ज़्यादा नियंत्रण न होने के कारण, कई छोटे शहरों में यह कटौतीयां कई घंटो तक जारी रहती हैं। सोलर सिस्टम लगाने के बाद, आपको इस परेशानी से भी पूरे तरीके से निजात मिल जाएगा। भारत के लगभग हर राज्य में सौर ऊर्जा की भरपूर उपलब्धता के कारण, यहां सोलर सिस्टम को कभी भी ज़्यादा देर तक डिस्चार्ज रहने का मौका नहीं मिलता है। यह पैनल, एक बार चार्ज होने के बाद आराम से कुछ दिनों तक सामान्य घरेलू इस्तेमाल के लिए उपयोग में लिए जा सकते हैं, इसलिए आपको इन कटौतीयों को अब और झेलने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है।
इतनी होगी सोलर सिस्टम के इस्तेमाल से बचत!
एक समान्य भारतीय घर में हर दिन, औसतन 4 KWh बिजली की खपत होती है। 1 KWh को सामान्य बोलचाल में 1 यूनिट भी कहा जाता है। भारत में औसत रूप से बिजली की कीमत 8 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से है। इस हिसाब से प्रति वर्ष आपको बिजली के लिए 15 से 20 हज़ार रुपए तक देने पड़ते हैं। वहीं 1 KWh का सोलर पैनल, प्रत्येक दिन 4 यूनिट तक की बिजली का उत्पादन करता है। देश की अग्रणी सोलर पैनल निर्माता कम्पनी Sunaurgy Renewables के 1 KWh के सोलर पैनल की कीमत 60 से 80 हज़ार के बीच में पड़ती है।
वहीं सब्सिडी के बाद, आप इसकी कीमत में और भी कमी देख सकते हैं। इस हिसाब से मात्र 2 वर्षों में आपके घर पर पैदा होने वाली बिजली, आपको पूरे तरीके से मुफ्त में उपलब्ध होगी। इसकी मदद से आप प्रत्येक वर्ष 20 से 25 हज़ार रुपए की बचत आसानी से कर पाएंगे। इसके अलावा, इन सोलर पैनल की बैटरी भी काफ़ी लंबे समय तक चलती है और इनके खराब होने के आसार भी काफी कम होते हैं।

निष्कर्ष:
अगर आप महीने-दर-महीने बढ़ते बिजली बिल से परेशान हैं और दीर्घकालिक बचत चाहते हैं, तो अपने घर पर सोलर सिस्टम लगाना सबसे समझदार निर्णय है।
सरकारी सब्सिडी, कम मेंटेनेंस और लंबी उम्र इसे एक उत्कृष्ट निवेश बनाते हैं।



